19 May 2015

तेरे हाथों से जब छूट जाएंगे हम

तेरे हाथों से जब छूट जाएंगे हम
आईने की तरह टूट जाएंगे हम
तेरे आंगन में कोई परिंदा नहीं
तेरे पिंजरे में आ रह जाएंगे हम
आज बारिश हुई है बड़े जोर की
ऐसा लगता है कि आज रोएंगे हम
बख्श दे मुझको जन्नत ऐ नाजनीं
तुझे पहलू में ले मर जाएंगे हम

1 comment:

Anonymous said...

nice line yaar