Best sayari

जो मिला मुसाफ़िर वो रास्ते बदल डाले
दो क़दम पे थी मंज़िल फ़ासले बदल डाले
आसमाँ को छूने की कूवतें जो रखता था
आज है वो बिखरा सा हौंसले बदल डाले
शान से मैं चलता था कोई शाह कि तरह
आ गया हूँ दर दर पे क़ाफ़िले बदल डाले
फूल बनके वो हमको दे गया चुभन इतनी
काँटों से है दोस्ती अब आसरे बदल डाले
इश्क़ ही ख़ुदा है सुन के थी आरज़ू आई
ख़ूब तुम ख़ुदा निकले वाक़िये बदल डाले 



उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ …
ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |
लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख – मिचौली का …
मिलेगी कामयाबी हौसला कमाल लिए बैठा हूँ l
चल मान लिया दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक
गिरेबान में अपने ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l
ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हें मुबारक …
मुझे क्या फ़िक्र मैं कश्तियां और दोस्त बेमिसाल लिए बैठा हूँ…

“मिला वो भी नही करते,
मिला हम भी नही करते.”
“दगा वो भी नही करते,
दगा हम भी नही करते.”
“उन्हे रुसवाई का दुख,
हमे तन्हाई का डर”
“गिला वो भी नही करते,
शिकवा हम भी नही करते.”
“किसी मोड़ पर मुलाकात हो जाती है अक्सर”
“रुका वो भी नही करते,
ठहरा हम भी नही करते.”
“जब भी देखते हैं उन्हे,
सोचते है कुछ कहें उनसे.”
“सुना वो भी नही करते,
कहा हम भी नही करते.”
“लेकिन ये भी सच है,
की मोहब्बत उन्हे भी हे हमसे”
“इकरार वो भी नही करते,
इज़हार हम भी नही करते.

Mere pehlu mein bhi ek shama jala karti h
Jiski lou se teri tasveer bana karti hain,
Samne tere zuban band hi rehti hai magar,
Dil ki jo baat hai wo aankh bayan karti hai,
Chup kyu ho humse koi baat karo ae-dilwar,
Aise khamoshi se to takleef badaa karti hai,
Shamma jalti h to zamane ko pata chalta h,
Dil k jalne ki khabar aakhir kisko hua karti h


हम भी लेते हैं इन चांद-सितारों से सबक
रोशनी हो तो वो दिखती है बड़ी दूर तलक
तेरे जादू से कयामत भी ठहर जाती है
आज भी दिल में रूकी है तेरे गम की कसक
मुझसे मेरे ही खयालों में बात करती हो
बंद रखता हूं तेरे खातिर अपने दोनों पलक
दिल के सागर में तो बस खारे आंसू हैं
मेरी आंखों ने भी देखे हैं तूफां की झलक
जिंदगी जख्म की तस्वीर बनके रह गई
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गई
मैं बना फिरता हूं दीवाना तेरे गम में
तू मेरे पैरों की जंजीर बनके रह गई
इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते
ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई
सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी
ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

मैं परिंदों की तरह आस्मा में उड़ता था
आठों पहर तेरे ख़यालों में डूबा रहता था
मुझपे इतनी तो इनायत की सनम तुमने
मुस्कुराती थी जब तुमको सनम कहता था
तू जो खोयी तो ये सारा जहां वीरान हुआ
अब वो जोगी हुआ जो कल तेरा दीवाना था
मैं तो टुकड़ों को जोड़ता हूँ कि तुझे देखूँ
तू ही तस्वीर थी और दिल मेरा आईना था


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