पंडित से आशिक बने तेरे इश्क मे
ख़ुसीयो मे उदासी बने तेरे इश्क मे
भीड़ मे भी तन्हाई मिली तेरे इश्क मे
सोचा था मालूम ना हो,खोए है हम तेरे इश्क मे
पता भी चला आपको, मुखातिर हुए हम तेरे इश्क मे
की थी दोस्ती की शुरुआत, सब भूल कर तेरे इश्क मे
खुस हुआ था पाकर दोस्ती आपकी,झूमा थातेरे इश्क मे
संदेशो पे संदेशे थे, और भी संदेशो का इंतेजार था तेरे इश्क मे
संदेश तो कबूतर था, हालत - ए - आशिक तेरे इश्क मे
भरोशा किया आप पे खुद से ज़्यादा, भूल कर तेरे इश्क मे
हुए हम जुड़ा, सोचे रब की सज़ा है तेरे इश्क मे
भूल कर आपको चल रहे थे राह मे, पर भटक गये तेरे इश्क मे
फिर मिले हम रब की दुआ से सच्चाई थीशायद तेरे इश्क मे
हाथ जोड़ प्रार्थना करता तेरे इश्क मे
पर कहा ना दिल की बात की मरते है हम तेरे इश्क मे
पड़ाई तो बहाना था, सुबह उठ निकल जाता तेरे इश्क मे
करता इंतेजार ग्राम के तेरे द्वार पर, कहते त लोग पागल है तेरे इश्क मे
इंतेजार मे भी प्यार है,सिखाया तेरे इश्क मे
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