18 March 2015

सब बिक जाता है

कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,
मिले अगर भाव अच्छा, जड्ज भी कुर्सी बेच देता है,
तवायफ़ फिर भी अच्छी के वो सीमिटि है कोठे तक,
पोलीस वाला तो चौराहे पर वर्दी बेच देता है,
जला दी जाती है ससुराल मेी अक्सर वोही बेटी,
की जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है.
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है जिस पर,
बनाकर वीडियो उसका वो प्रेमी बेच देता है.
यह कलयुग है कोई भी चीज़ ना-मुमकिन नही इसमें,
काली, फल-फूल, पेड़-पौधे सब माली बेच देता है.
किसी ने मोहब्बत में "दिल हरा है" तो क्यूँ हैरत है लोगों को,
युधिष्ठिर तो जुएें में अपनी पत्नी बेच देता है.

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