22 March 2015

मैं परिंदों की तरह आस्मा में उड़ता था

मैं परिंदों की तरह आस्मा में उड़ता था
आठों पहर तेरे ख़यालों में डूबा रहता था
मुझपे इतनी तो इनायत की सनम तुमने
मुस्कुराती थी जब तुमको सनम कहता था
तू जो खोयी तो ये सारा जहां वीरान हुआ
अब वो जोगी हुआ जो कल तेरा दीवाना था
मैं तो टुकड़ों को जोड़ता हूँ कि तुझे देखूँ
तू ही तस्वीर थी और दिल मेरा आईना था

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