15 January 2015

Peshawar Hamala DIL SE........YAAD HAI MUJHE

Peshawar Hamala

हमें याद है वह सुबह
जब मां ने प्यार से
तुम्हें दुलारा था
नहलाया था सजाया था
खाना खिलाया था और
प्यार से तुम्हें रवाना किया था
स्कूल के लिए इस आशा से
‍कि तुम आओगे पुन: चंद घंटों बाद
कुछ ज्यादा समझदार बनकर
पर नहीं सुनाई दी थी तुम्हारे
आने की पदचाप वह
मां की प्यारी आवाज
वह स्कूल का बस्ता
वह टिफिन का डिब्बा
बच्चे रोते रहे क्रंदन करते रहे
हैवान खेलते रहे हैं हैवानियत का खेल
दम तोड़ती‍ रही इंसानियत
तड़पकर खत्म हो रही मासूमियत
वे नहीं समझ पा रहे थे कि
बच्चे भगवान स्वरूप हैं
वे पृथ्वी पर फरिश्तों का नया रूप हैं
फिर भगवान पर उंगली क्यों उठाते हों
फरिश्ते पर कीचड़ क्यों उछालते हो
तुम नहीं जानते तुम्हारी ये हरकतें
पैदा करेगी लाखों मलाला
जो दुनिया से खत्म करेगी
वैमनस्यता और नफरत की ज्वाला
तुम्हारी ये नापाक हरकत और घिनौनापन
नहीं खत्म कर पाएगा आदमी और
आदमी के बीच अपनापन
सैकड़ों बच्चों का बलिदान

व्यर्थ नहीं जाएगा

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